= > अपने बनाने वाले को पहचानो इससे पहले की मौत आ जाए और तुम पछताते हुए रह जाओ , अल्लाह से माफी मांगो वह बड़ा माफ करने वाला , रहम करने वाला , तमाम तारीफ उसी के लिए हैं ।
= > जिसको अल्लाह के सिवा पूजा जाता है , अगर सभी एक साथ मिल भी जाए तो एक मक्खी नहीं बना सकते , अगर मक्खी उन पर बैठ जाए तो उसे उड़ा नहीं सकते , और मक्खी अगर उनसे छीन कर कुछ ले जाए तो उसे छुड़ा नहीं सकते , अगर गिर जाए तो उठ नहीं सकते , टूट जाए तो जुड़ नहीं सकते और कुछ बना नहीं सकते खुद बनाए जाते हैं ।
= > अल्लाह ना बीवी रखता है ना औलाद वह बेनियाज़ है , उसे किसी खाने पीने , औरत बच्चे की जरूरत नहीं , वह किसी चीज का मोहताज नहीं बल्कि सब उसके मोहताज है , अल्लाह को ना ऊंघ आती है ना नींद वह हमेशा हमेशा से जिंदा है और हमेशा हमेशा जिंदा रहेगा
= > जिसने तुम्हें बनाया है गंदे पानी की कुछ बूंदों से ( मां बाप से ) फिर वो गंदा पानी उसने आंख कान नाक में हड्डियों नसों में , धड़कते दिल तुम्हारे सोचते दिमाग बोलती हुई जुबान में , बदल दिया बताओ कितनी बड़ी शान वाला है अल्लाह । क्या यह सब अपने आप ही बन गए ? क्या इन्होंने अपने आप ही आकार ले लिया ? या इनको तुमने बनाया है ?
= > तुम्हारा दिल धड़क रहा तुम सांस ले रहे , मौत बुढ़ापा , क्या तुम यह रोक सकते हो ? इससे साबित होता है कि तुम पर तुम्हारी हुकूमत नहीं है उस अल्लाह की है जो सब कुछ बनाने वाला है , कुरान में एक आयत का महफूम है कि " उसकी शान यह है कि वह जब किसी चीज का इरादा करता है कह देता है के हो जा तो वह हो जाता है "
1) सबसे पहला अल्लाह का हुकुम यह है कि यकीन हो उस अल्लाह पर यानी कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के लायक नहीं मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम अल्लाह के बंदे आखरी पैगंबर रसूल है ।
2) दूसरा हुकुम पांच वक्त की नमाज का है जिस ने जानबूझकर ये पांच वक्त की नमाज छोड़ी वो काफिर हो गया ।
= > ध्यान रखो कि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम एक मक्खी नहीं बना सकते वह मोहताज हैं । अवतार यानी पैगंबर की भी पूजा नहीं हो सकती पहले भी पैगंबर आए हैं और कुरान की तरह पहले भी किताबें उतरी हैं अल्लाह की तरफ से ।
1.) या रसूल अल्लाह कहना ,मौला अली , या अली ,भर दो झोली मेरी या मोहम्मद , या हुसैन , दरगाह पर कब्रों पर सजदा करना , जिसकी मौत हो चुकी है उसको या कहकर पुकारना काफिर बना देता है। मातम मनाना मोहर्रम को , यह हराम है और । जबकि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम पैगंबर ने यह सब चीजें नहीं बताई ।
या का मतलब होता है पुकारना।
जिसको मौत आ जाए उसको पुकारा नहीं जा सकता और अल्लाह हर जगह मौजूद है उसको पुकार सकते हैं ।
= ) मान लो अगर तुम्हारी मां जिंदा है तो तुम कहोगे या मां मुझे रोटी दे दो । तो मां तुम रोटी दे देगी ठीक है।
अब मान लो तुम्हारी मां को मौत आ जाती है और अब तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद ना होगी अब अगर तुमने यह कहा या मां मुझे रोटी दे दो।
तो तुम काफिर हो जाओगे क्योंकि तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद नहीं और अल्लाह हर जगह मौजूद है ।
तुम अल्लाह से कह सकते हो या अल्लाह मुझे रोटी दे दो मेरी मदद कीजिए या अल्लाह मुझ पर रहम फरमाए मैं माफी मांगता हूं या अल्लाह मुझे बख्श दीजिए ।
इसी वजह से , या रसूल अल्लाह , या अली मदद , या मदद अली , या साबिर , या हुसैन कहना ,काफिर बना देता है।
= > कहीं भी किसी दरगाह पर जाकर सजदा ना करना दरगाह वालों से जाकर दुआएं ना मांगना उन्हें खुद मौत आ चुकी है वह खुद अल्लाह के मोहताज है जैसे कि तुम मोहताज हो अल्लाह के सिवा किसी से भी ना मांगना यहां तक के इंसानों के सामने भी ज्यादा गिड़गिड़ाना गिड़गिड़ाना कुफर की तरफ ले जाता है।
2.) और अगर कोई जिना करने गया और उसने चारों तरफ से पर्दे लगा लिए लेकिन फिर उसने क्या कर दिया सिर्क अल्लाह के साथ क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है जबकि अल्लाह के साथ किसी दूसरे को शरीक कर रहा है कि कहीं कोई देख ना ले। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
3.) अगर कोई बच्चा बाप के बटुए में से पैसे निकालने गया और फिर देख रहा है कि कहीं मेरा बाप तो नहीं देख रहा तो उसने अल्लाह के साथ सिर्क कर दिया क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है अल्लाह के साथ अपने बाप को शरीक कर रहा है। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
कुरान अपनी भाषा में सुनो youtube पर उल्टी उल्टी चीजें देखने के बजाय तुम्हें पता लगे कि उस मालिक ने क्या हुकुम भेजा है
= > अपने बनाने वाले को पहचानो इससे पहले की मौत आ जाए और तुम पछताते हुए रह जाओ , अल्लाह से माफी मांगो वह बड़ा माफ करने वाला , रहम करने वाला , तमाम तारीफ उसी के लिए हैं ।
= > जिसको अल्लाह के सिवा पूजा जाता है , अगर सभी एक साथ मिल भी जाए तो एक मक्खी नहीं बना सकते , अगर मक्खी उन पर बैठ जाए तो उसे उड़ा नहीं सकते , और मक्खी अगर उनसे छीन कर कुछ ले जाए तो उसे छुड़ा नहीं सकते , अगर गिर जाए तो उठ नहीं सकते , टूट जाए तो जुड़ नहीं सकते और कुछ बना नहीं सकते खुद बनाए जाते हैं ।
= > अल्लाह ना बीवी रखता है ना औलाद वह बेनियाज़ है , उसे किसी खाने पीने , औरत बच्चे की जरूरत नहीं , वह किसी चीज का मोहताज नहीं बल्कि सब उसके मोहताज है , अल्लाह को ना ऊंघ आती है ना नींद वह हमेशा हमेशा से जिंदा है और हमेशा हमेशा जिंदा रहेगा
= > जिसने तुम्हें बनाया है गंदे पानी की कुछ बूंदों से ( मां बाप से ) फिर वो गंदा पानी उसने आंख कान नाक में हड्डियों नसों में , धड़कते दिल तुम्हारे सोचते दिमाग बोलती हुई जुबान में , बदल दिया बताओ कितनी बड़ी शान वाला है अल्लाह । क्या यह सब अपने आप ही बन गए ? क्या इन्होंने अपने आप ही आकार ले लिया ? या इनको तुमने बनाया है ?
= > तुम्हारा दिल धड़क रहा तुम सांस ले रहे , मौत बुढ़ापा , क्या तुम यह रोक सकते हो ? इससे साबित होता है कि तुम पर तुम्हारी हुकूमत नहीं है उस अल्लाह की है जो सब कुछ बनाने वाला है , कुरान में एक आयत का महफूम है कि " उसकी शान यह है कि वह जब किसी चीज का इरादा करता है कह देता है के हो जा तो वह हो जाता है "
1) सबसे पहला अल्लाह का हुकुम यह है कि यकीन हो उस अल्लाह पर यानी कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के लायक नहीं मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम अल्लाह के बंदे आखरी पैगंबर रसूल है ।
2) दूसरा हुकुम पांच वक्त की नमाज का है जिस ने जानबूझकर ये पांच वक्त की नमाज छोड़ी वो काफिर हो गया ।
= > ध्यान रखो कि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम एक मक्खी नहीं बना सकते वह मोहताज हैं । अवतार यानी पैगंबर की भी पूजा नहीं हो सकती पहले भी पैगंबर आए हैं और कुरान की तरह पहले भी किताबें उतरी हैं अल्लाह की तरफ से ।
1.) या रसूल अल्लाह कहना ,मौला अली , या अली ,भर दो झोली मेरी या मोहम्मद , या हुसैन , दरगाह पर कब्रों पर सजदा करना , जिसकी मौत हो चुकी है उसको या कहकर पुकारना काफिर बना देता है। मातम मनाना मोहर्रम को , यह हराम है और । जबकि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम पैगंबर ने यह सब चीजें नहीं बताई ।
या का मतलब होता है पुकारना।
जिसको मौत आ जाए उसको पुकारा नहीं जा सकता और अल्लाह हर जगह मौजूद है उसको पुकार सकते हैं ।
= ) मान लो अगर तुम्हारी मां जिंदा है तो तुम कहोगे या मां मुझे रोटी दे दो । तो मां तुम रोटी दे देगी ठीक है।
अब मान लो तुम्हारी मां को मौत आ जाती है और अब तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद ना होगी अब अगर तुमने यह कहा या मां मुझे रोटी दे दो।
तो तुम काफिर हो जाओगे क्योंकि तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद नहीं और अल्लाह हर जगह मौजूद है ।
तुम अल्लाह से कह सकते हो या अल्लाह मुझे रोटी दे दो मेरी मदद कीजिए या अल्लाह मुझ पर रहम फरमाए मैं माफी मांगता हूं या अल्लाह मुझे बख्श दीजिए ।
इसी वजह से , या रसूल अल्लाह , या अली मदद , या मदद अली , या साबिर , या हुसैन कहना ,काफिर बना देता है।
= > कहीं भी किसी दरगाह पर जाकर सजदा ना करना दरगाह वालों से जाकर दुआएं ना मांगना उन्हें खुद मौत आ चुकी है वह खुद अल्लाह के मोहताज है जैसे कि तुम मोहताज हो अल्लाह के सिवा किसी से भी ना मांगना यहां तक के इंसानों के सामने भी ज्यादा गिड़गिड़ाना गिड़गिड़ाना कुफर की तरफ ले जाता है।
2.) और अगर कोई जिना करने गया और उसने चारों तरफ से पर्दे लगा लिए लेकिन फिर उसने क्या कर दिया सिर्क अल्लाह के साथ क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है जबकि अल्लाह के साथ किसी दूसरे को शरीक कर रहा है कि कहीं कोई देख ना ले। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
3.) अगर कोई बच्चा बाप के बटुए में से पैसे निकालने गया और फिर देख रहा है कि कहीं मेरा बाप तो नहीं देख रहा तो उसने अल्लाह के साथ सिर्क कर दिया क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है अल्लाह के साथ अपने बाप को शरीक कर रहा है। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
कुरान अपनी भाषा में सुनो youtube पर उल्टी उल्टी चीजें देखने के बजाय तुम्हें पता लगे कि उस मालिक ने क्या हुकुम भेजा है
= > अपने बनाने वाले को पहचानो इससे पहले की मौत आ जाए और तुम पछताते हुए रह जाओ , अल्लाह से माफी मांगो वह बड़ा माफ करने वाला , रहम करने वाला , तमाम तारीफ उसी के लिए हैं ।
= > जिसको अल्लाह के सिवा पूजा जाता है , अगर सभी एक साथ मिल भी जाए तो एक मक्खी नहीं बना सकते , अगर मक्खी उन पर बैठ जाए तो उसे उड़ा नहीं सकते , और मक्खी अगर उनसे छीन कर कुछ ले जाए तो उसे छुड़ा नहीं सकते , अगर गिर जाए तो उठ नहीं सकते , टूट जाए तो जुड़ नहीं सकते और कुछ बना नहीं सकते खुद बनाए जाते हैं ।
= > अल्लाह ना बीवी रखता है ना औलाद वह बेनियाज़ है , उसे किसी खाने पीने , औरत बच्चे की जरूरत नहीं , वह किसी चीज का मोहताज नहीं बल्कि सब उसके मोहताज है , अल्लाह को ना ऊंघ आती है ना नींद वह हमेशा हमेशा से जिंदा है और हमेशा हमेशा जिंदा रहेगा
= > जिसने तुम्हें बनाया है गंदे पानी की कुछ बूंदों से ( मां बाप से ) फिर वो गंदा पानी उसने आंख कान नाक में हड्डियों नसों में , धड़कते दिल तुम्हारे सोचते दिमाग बोलती हुई जुबान में , बदल दिया बताओ कितनी बड़ी शान वाला है अल्लाह । क्या यह सब अपने आप ही बन गए ? क्या इन्होंने अपने आप ही आकार ले लिया ? या इनको तुमने बनाया है ?
= > तुम्हारा दिल धड़क रहा तुम सांस ले रहे , मौत बुढ़ापा , क्या तुम यह रोक सकते हो ? इससे साबित होता है कि तुम पर तुम्हारी हुकूमत नहीं है उस अल्लाह की है जो सब कुछ बनाने वाला है , कुरान में एक आयत का महफूम है कि " उसकी शान यह है कि वह जब किसी चीज का इरादा करता है कह देता है के हो जा तो वह हो जाता है "
1) सबसे पहला अल्लाह का हुकुम यह है कि यकीन हो उस अल्लाह पर यानी कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के लायक नहीं मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम अल्लाह के बंदे आखरी पैगंबर रसूल है ।
2) दूसरा हुकुम पांच वक्त की नमाज का है जिस ने जानबूझकर ये पांच वक्त की नमाज छोड़ी वो काफिर हो गया ।
= > ध्यान रखो कि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम एक मक्खी नहीं बना सकते वह मोहताज हैं । अवतार यानी पैगंबर की भी पूजा नहीं हो सकती पहले भी पैगंबर आए हैं और कुरान की तरह पहले भी किताबें उतरी हैं अल्लाह की तरफ से ।
1.) या रसूल अल्लाह कहना ,मौला अली , या अली ,भर दो झोली मेरी या मोहम्मद , या हुसैन , दरगाह पर कब्रों पर सजदा करना , जिसकी मौत हो चुकी है उसको या कहकर पुकारना काफिर बना देता है। मातम मनाना मोहर्रम को , यह हराम है और । जबकि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम पैगंबर ने यह सब चीजें नहीं बताई ।
या का मतलब होता है पुकारना।
जिसको मौत आ जाए उसको पुकारा नहीं जा सकता और अल्लाह हर जगह मौजूद है उसको पुकार सकते हैं ।
= ) मान लो अगर तुम्हारी मां जिंदा है तो तुम कहोगे या मां मुझे रोटी दे दो । तो मां तुम रोटी दे देगी ठीक है।
अब मान लो तुम्हारी मां को मौत आ जाती है और अब तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद ना होगी अब अगर तुमने यह कहा या मां मुझे रोटी दे दो।
तो तुम काफिर हो जाओगे क्योंकि तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद नहीं और अल्लाह हर जगह मौजूद है ।
तुम अल्लाह से कह सकते हो या अल्लाह मुझे रोटी दे दो मेरी मदद कीजिए या अल्लाह मुझ पर रहम फरमाए मैं माफी मांगता हूं या अल्लाह मुझे बख्श दीजिए ।
इसी वजह से , या रसूल अल्लाह , या अली मदद , या मदद अली , या साबिर , या हुसैन कहना ,काफिर बना देता है।
= > कहीं भी किसी दरगाह पर जाकर सजदा ना करना दरगाह वालों से जाकर दुआएं ना मांगना उन्हें खुद मौत आ चुकी है वह खुद अल्लाह के मोहताज है जैसे कि तुम मोहताज हो अल्लाह के सिवा किसी से भी ना मांगना यहां तक के इंसानों के सामने भी ज्यादा गिड़गिड़ाना गिड़गिड़ाना कुफर की तरफ ले जाता है।
2.) और अगर कोई जिना करने गया और उसने चारों तरफ से पर्दे लगा लिए लेकिन फिर उसने क्या कर दिया सिर्क अल्लाह के साथ क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है जबकि अल्लाह के साथ किसी दूसरे को शरीक कर रहा है कि कहीं कोई देख ना ले। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
3.) अगर कोई बच्चा बाप के बटुए में से पैसे निकालने गया और फिर देख रहा है कि कहीं मेरा बाप तो नहीं देख रहा तो उसने अल्लाह के साथ सिर्क कर दिया क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है अल्लाह के साथ अपने बाप को शरीक कर रहा है। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
कुरान अपनी भाषा में सुनो youtube पर उल्टी उल्टी चीजें देखने के बजाय तुम्हें पता लगे कि उस मालिक ने क्या हुकुम भेजा है
= > अपने बनाने वाले को पहचानो इससे पहले की मौत आ जाए और तुम पछताते हुए रह जाओ , अल्लाह से माफी मांगो वह बड़ा माफ करने वाला , रहम करने वाला , तमाम तारीफ उसी के लिए हैं ।
= > जिसको अल्लाह के सिवा पूजा जाता है , अगर सभी एक साथ मिल भी जाए तो एक मक्खी नहीं बना सकते , अगर मक्खी उन पर बैठ जाए तो उसे उड़ा नहीं सकते , और मक्खी अगर उनसे छीन कर कुछ ले जाए तो उसे छुड़ा नहीं सकते , अगर गिर जाए तो उठ नहीं सकते , टूट जाए तो जुड़ नहीं सकते और कुछ बना नहीं सकते खुद बनाए जाते हैं ।
= > अल्लाह ना बीवी रखता है ना औलाद वह बेनियाज़ है , उसे किसी खाने पीने , औरत बच्चे की जरूरत नहीं , वह किसी चीज का मोहताज नहीं बल्कि सब उसके मोहताज है , अल्लाह को ना ऊंघ आती है ना नींद वह हमेशा हमेशा से जिंदा है और हमेशा हमेशा जिंदा रहेगा
= > जिसने तुम्हें बनाया है गंदे पानी की कुछ बूंदों से ( मां बाप से ) फिर वो गंदा पानी उसने आंख कान नाक में हड्डियों नसों में , धड़कते दिल तुम्हारे सोचते दिमाग बोलती हुई जुबान में , बदल दिया बताओ कितनी बड़ी शान वाला है अल्लाह । क्या यह सब अपने आप ही बन गए ? क्या इन्होंने अपने आप ही आकार ले लिया ? या इनको तुमने बनाया है ?
= > तुम्हारा दिल धड़क रहा तुम सांस ले रहे , मौत बुढ़ापा , क्या तुम यह रोक सकते हो ? इससे साबित होता है कि तुम पर तुम्हारी हुकूमत नहीं है उस अल्लाह की है जो सब कुछ बनाने वाला है , कुरान में एक आयत का महफूम है कि " उसकी शान यह है कि वह जब किसी चीज का इरादा करता है कह देता है के हो जा तो वह हो जाता है "
1) सबसे पहला अल्लाह का हुकुम यह है कि यकीन हो उस अल्लाह पर यानी कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के लायक नहीं मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम अल्लाह के बंदे आखरी पैगंबर रसूल है ।
2) दूसरा हुकुम पांच वक्त की नमाज का है जिस ने जानबूझकर ये पांच वक्त की नमाज छोड़ी वो काफिर हो गया ।
= > ध्यान रखो कि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम एक मक्खी नहीं बना सकते वह मोहताज हैं । अवतार यानी पैगंबर की भी पूजा नहीं हो सकती पहले भी पैगंबर आए हैं और कुरान की तरह पहले भी किताबें उतरी हैं अल्लाह की तरफ से ।
1.) या रसूल अल्लाह कहना ,मौला अली , या अली ,भर दो झोली मेरी या मोहम्मद , या हुसैन , दरगाह पर कब्रों पर सजदा करना , जिसकी मौत हो चुकी है उसको या कहकर पुकारना काफिर बना देता है। मातम मनाना मोहर्रम को , यह हराम है और । जबकि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम पैगंबर ने यह सब चीजें नहीं बताई ।
या का मतलब होता है पुकारना।
जिसको मौत आ जाए उसको पुकारा नहीं जा सकता और अल्लाह हर जगह मौजूद है उसको पुकार सकते हैं ।
= ) मान लो अगर तुम्हारी मां जिंदा है तो तुम कहोगे या मां मुझे रोटी दे दो । तो मां तुम रोटी दे देगी ठीक है।
अब मान लो तुम्हारी मां को मौत आ जाती है और अब तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद ना होगी अब अगर तुमने यह कहा या मां मुझे रोटी दे दो।
तो तुम काफिर हो जाओगे क्योंकि तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद नहीं और अल्लाह हर जगह मौजूद है ।
तुम अल्लाह से कह सकते हो या अल्लाह मुझे रोटी दे दो मेरी मदद कीजिए या अल्लाह मुझ पर रहम फरमाए मैं माफी मांगता हूं या अल्लाह मुझे बख्श दीजिए ।
इसी वजह से , या रसूल अल्लाह , या अली मदद , या मदद अली , या साबिर , या हुसैन कहना ,काफिर बना देता है।
= > कहीं भी किसी दरगाह पर जाकर सजदा ना करना दरगाह वालों से जाकर दुआएं ना मांगना उन्हें खुद मौत आ चुकी है वह खुद अल्लाह के मोहताज है जैसे कि तुम मोहताज हो अल्लाह के सिवा किसी से भी ना मांगना यहां तक के इंसानों के सामने भी ज्यादा गिड़गिड़ाना गिड़गिड़ाना कुफर की तरफ ले जाता है।
2.) और अगर कोई जिना करने गया और उसने चारों तरफ से पर्दे लगा लिए लेकिन फिर उसने क्या कर दिया सिर्क अल्लाह के साथ क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है जबकि अल्लाह के साथ किसी दूसरे को शरीक कर रहा है कि कहीं कोई देख ना ले। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
3.) अगर कोई बच्चा बाप के बटुए में से पैसे निकालने गया और फिर देख रहा है कि कहीं मेरा बाप तो नहीं देख रहा तो उसने अल्लाह के साथ सिर्क कर दिया क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है अल्लाह के साथ अपने बाप को शरीक कर रहा है। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
कुरान अपनी भाषा में सुनो youtube पर उल्टी उल्टी चीजें देखने के बजाय तुम्हें पता लगे कि उस मालिक ने क्या हुकुम भेजा है
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= > अपने बनाने वाले को पहचानो इससे पहले की मौत आ जाए और तुम पछताते हुए रह जाओ , अल्लाह से माफी मांगो वह बड़ा माफ करने वाला , रहम करने वाला , तमाम तारीफ उसी के लिए हैं ।
= > जिसको अल्लाह के सिवा पूजा जाता है , अगर सभी एक साथ मिल भी जाए तो एक मक्खी नहीं बना सकते , अगर मक्खी उन पर बैठ जाए तो उसे उड़ा नहीं सकते , और मक्खी अगर उनसे छीन कर कुछ ले जाए तो उसे छुड़ा नहीं सकते , अगर गिर जाए तो उठ नहीं सकते , टूट जाए तो जुड़ नहीं सकते और कुछ बना नहीं सकते खुद बनाए जाते हैं ।
= > अल्लाह ना बीवी रखता है ना औलाद वह बेनियाज़ है , उसे किसी खाने पीने , औरत बच्चे की जरूरत नहीं , वह किसी चीज का मोहताज नहीं बल्कि सब उसके मोहताज है , अल्लाह को ना ऊंघ आती है ना नींद वह हमेशा हमेशा से जिंदा है और हमेशा हमेशा जिंदा रहेगा
= > जिसने तुम्हें बनाया है गंदे पानी की कुछ बूंदों से ( मां बाप से ) फिर वो गंदा पानी उसने आंख कान नाक में हड्डियों नसों में , धड़कते दिल तुम्हारे सोचते दिमाग बोलती हुई जुबान में , बदल दिया बताओ कितनी बड़ी शान वाला है अल्लाह । क्या यह सब अपने आप ही बन गए ? क्या इन्होंने अपने आप ही आकार ले लिया ? या इनको तुमने बनाया है ?
= > तुम्हारा दिल धड़क रहा तुम सांस ले रहे , मौत बुढ़ापा , क्या तुम यह रोक सकते हो ? इससे साबित होता है कि तुम पर तुम्हारी हुकूमत नहीं है उस अल्लाह की है जो सब कुछ बनाने वाला है , कुरान में एक आयत का महफूम है कि " उसकी शान यह है कि वह जब किसी चीज का इरादा करता है कह देता है के हो जा तो वह हो जाता है "
1) सबसे पहला अल्लाह का हुकुम यह है कि यकीन हो उस अल्लाह पर यानी कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के लायक नहीं मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम अल्लाह के बंदे आखरी पैगंबर रसूल है ।
2) दूसरा हुकुम पांच वक्त की नमाज का है जिस ने जानबूझकर ये पांच वक्त की नमाज छोड़ी वो काफिर हो गया ।
= > ध्यान रखो कि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम एक मक्खी नहीं बना सकते वह मोहताज हैं । अवतार यानी पैगंबर की भी पूजा नहीं हो सकती पहले भी पैगंबर आए हैं और कुरान की तरह पहले भी किताबें उतरी हैं अल्लाह की तरफ से ।
1.) या रसूल अल्लाह कहना ,मौला अली , या अली ,भर दो झोली मेरी या मोहम्मद , या हुसैन , दरगाह पर कब्रों पर सजदा करना , जिसकी मौत हो चुकी है उसको या कहकर पुकारना काफिर बना देता है। मातम मनाना मोहर्रम को , यह हराम है और । जबकि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम पैगंबर ने यह सब चीजें नहीं बताई ।
या का मतलब होता है पुकारना।
जिसको मौत आ जाए उसको पुकारा नहीं जा सकता और अल्लाह हर जगह मौजूद है उसको पुकार सकते हैं ।
= ) मान लो अगर तुम्हारी मां जिंदा है तो तुम कहोगे या मां मुझे रोटी दे दो । तो मां तुम रोटी दे देगी ठीक है।
अब मान लो तुम्हारी मां को मौत आ जाती है और अब तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद ना होगी अब अगर तुमने यह कहा या मां मुझे रोटी दे दो।
तो तुम काफिर हो जाओगे क्योंकि तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद नहीं और अल्लाह हर जगह मौजूद है ।
तुम अल्लाह से कह सकते हो या अल्लाह मुझे रोटी दे दो मेरी मदद कीजिए या अल्लाह मुझ पर रहम फरमाए मैं माफी मांगता हूं या अल्लाह मुझे बख्श दीजिए ।
इसी वजह से , या रसूल अल्लाह , या अली मदद , या मदद अली , या साबिर , या हुसैन कहना ,काफिर बना देता है।
= > कहीं भी किसी दरगाह पर जाकर सजदा ना करना दरगाह वालों से जाकर दुआएं ना मांगना उन्हें खुद मौत आ चुकी है वह खुद अल्लाह के मोहताज है जैसे कि तुम मोहताज हो अल्लाह के सिवा किसी से भी ना मांगना यहां तक के इंसानों के सामने भी ज्यादा गिड़गिड़ाना गिड़गिड़ाना कुफर की तरफ ले जाता है।
2.) और अगर कोई जिना करने गया और उसने चारों तरफ से पर्दे लगा लिए लेकिन फिर उसने क्या कर दिया सिर्क अल्लाह के साथ क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है जबकि अल्लाह के साथ किसी दूसरे को शरीक कर रहा है कि कहीं कोई देख ना ले। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
3.) अगर कोई बच्चा बाप के बटुए में से पैसे निकालने गया और फिर देख रहा है कि कहीं मेरा बाप तो नहीं देख रहा तो उसने अल्लाह के साथ सिर्क कर दिया क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है अल्लाह के साथ अपने बाप को शरीक कर रहा है। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
कुरान अपनी भाषा में सुनो youtube पर उल्टी उल्टी चीजें देखने के बजाय तुम्हें पता लगे कि उस मालिक ने क्या हुकुम भेजा है
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= > अपने बनाने वाले को पहचानो इससे पहले की मौत आ जाए और तुम पछताते हुए रह जाओ , अल्लाह से माफी मांगो वह बड़ा माफ करने वाला , रहम करने वाला , तमाम तारीफ उसी के लिए हैं ।
= > जिसको अल्लाह के सिवा पूजा जाता है , अगर सभी एक साथ मिल भी जाए तो एक मक्खी नहीं बना सकते , अगर मक्खी उन पर बैठ जाए तो उसे उड़ा नहीं सकते , और मक्खी अगर उनसे छीन कर कुछ ले जाए तो उसे छुड़ा नहीं सकते , अगर गिर जाए तो उठ नहीं सकते , टूट जाए तो जुड़ नहीं सकते और कुछ बना नहीं सकते खुद बनाए जाते हैं ।
= > अल्लाह ना बीवी रखता है ना औलाद वह बेनियाज़ है , उसे किसी खाने पीने , औरत बच्चे की जरूरत नहीं , वह किसी चीज का मोहताज नहीं बल्कि सब उसके मोहताज है , अल्लाह को ना ऊंघ आती है ना नींद वह हमेशा हमेशा से जिंदा है और हमेशा हमेशा जिंदा रहेगा
= > जिसने तुम्हें बनाया है गंदे पानी की कुछ बूंदों से ( मां बाप से ) फिर वो गंदा पानी उसने आंख कान नाक में हड्डियों नसों में , धड़कते दिल तुम्हारे सोचते दिमाग बोलती हुई जुबान में , बदल दिया बताओ कितनी बड़ी शान वाला है अल्लाह । क्या यह सब अपने आप ही बन गए ? क्या इन्होंने अपने आप ही आकार ले लिया ? या इनको तुमने बनाया है ?
= > तुम्हारा दिल धड़क रहा तुम सांस ले रहे , मौत बुढ़ापा , क्या तुम यह रोक सकते हो ? इससे साबित होता है कि तुम पर तुम्हारी हुकूमत नहीं है उस अल्लाह की है जो सब कुछ बनाने वाला है , कुरान में एक आयत का महफूम है कि " उसकी शान यह है कि वह जब किसी चीज का इरादा करता है कह देता है के हो जा तो वह हो जाता है "
1) सबसे पहला अल्लाह का हुकुम यह है कि यकीन हो उस अल्लाह पर यानी कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के लायक नहीं मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम अल्लाह के बंदे आखरी पैगंबर रसूल है ।
2) दूसरा हुकुम पांच वक्त की नमाज का है जिस ने जानबूझकर ये पांच वक्त की नमाज छोड़ी वो काफिर हो गया ।
= > ध्यान रखो कि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम एक मक्खी नहीं बना सकते वह मोहताज हैं । अवतार यानी पैगंबर की भी पूजा नहीं हो सकती पहले भी पैगंबर आए हैं और कुरान की तरह पहले भी किताबें उतरी हैं अल्लाह की तरफ से ।
1.) या रसूल अल्लाह कहना ,मौला अली , या अली ,भर दो झोली मेरी या मोहम्मद , या हुसैन , दरगाह पर कब्रों पर सजदा करना , जिसकी मौत हो चुकी है उसको या कहकर पुकारना काफिर बना देता है। मातम मनाना मोहर्रम को , यह हराम है और । जबकि मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम पैगंबर ने यह सब चीजें नहीं बताई ।
या का मतलब होता है पुकारना।
जिसको मौत आ जाए उसको पुकारा नहीं जा सकता और अल्लाह हर जगह मौजूद है उसको पुकार सकते हैं ।
= ) मान लो अगर तुम्हारी मां जिंदा है तो तुम कहोगे या मां मुझे रोटी दे दो । तो मां तुम रोटी दे देगी ठीक है।
अब मान लो तुम्हारी मां को मौत आ जाती है और अब तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद ना होगी अब अगर तुमने यह कहा या मां मुझे रोटी दे दो।
तो तुम काफिर हो जाओगे क्योंकि तुम्हारी मां तुम्हारे पास मौजूद नहीं और अल्लाह हर जगह मौजूद है ।
तुम अल्लाह से कह सकते हो या अल्लाह मुझे रोटी दे दो मेरी मदद कीजिए या अल्लाह मुझ पर रहम फरमाए मैं माफी मांगता हूं या अल्लाह मुझे बख्श दीजिए ।
इसी वजह से , या रसूल अल्लाह , या अली मदद , या मदद अली , या साबिर , या हुसैन कहना ,काफिर बना देता है।
= > कहीं भी किसी दरगाह पर जाकर सजदा ना करना दरगाह वालों से जाकर दुआएं ना मांगना उन्हें खुद मौत आ चुकी है वह खुद अल्लाह के मोहताज है जैसे कि तुम मोहताज हो अल्लाह के सिवा किसी से भी ना मांगना यहां तक के इंसानों के सामने भी ज्यादा गिड़गिड़ाना गिड़गिड़ाना कुफर की तरफ ले जाता है।
2.) और अगर कोई जिना करने गया और उसने चारों तरफ से पर्दे लगा लिए लेकिन फिर उसने क्या कर दिया सिर्क अल्लाह के साथ क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है जबकि अल्लाह के साथ किसी दूसरे को शरीक कर रहा है कि कहीं कोई देख ना ले। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
3.) अगर कोई बच्चा बाप के बटुए में से पैसे निकालने गया और फिर देख रहा है कि कहीं मेरा बाप तो नहीं देख रहा तो उसने अल्लाह के साथ सिर्क कर दिया क्योंकि अल्लाह तो उसे देख रहा है अल्लाह के साथ अपने बाप को शरीक कर रहा है। अगर यह यकीन हो कि अल्लाह देख रहा है फिर कोई गुनाह ना होगा ।
कुरान अपनी भाषा में सुनो youtube पर उल्टी उल्टी चीजें देखने के बजाय तुम्हें पता लगे कि उस मालिक ने क्या हुकुम भेजा है
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